गुरुवार, 19 अगस्त 2021

खुद का जंगल कैसे उगाएं

वनों की कटाई से दुनिया भर में वन क्षेत्रों में कमी आ रही  है, भूमि के अन्य उपयोगों जैसे कृषि फसल भूमि का विकास,  शहरीकरण, या खनन गतिविधियों के लिए जंगलों को काटा जाता है. मानवीय गतिविधियों से बहुत तेजी से औद्योगीकरण, नयी बस्तियों का बसाया जाना ने  वनों की कटाई को बढ़ावा दिया है. इससे  प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता और जलवायु  प्रभावित हुई है. 


इसके अलावा  जंगलों में लगी आग ने भी जंगलों को बुरी तरह प्रभावित किया है. पहले जंगलों में  प्राकृतिक तरीके से जैसे गर्मी की दिनों में पेड़ों की टहनियां रगड़ने से. आकाशीय बिजली गिरने से ही आग लगती थी. ये आग या तो खुद ही बुझ जाती थी या फिर बुझा दी जाती थी. मानव गतिविधियों के कारण जैसे जंगल में रहने वालों के द्वारा आग लगाना, फसलों की लिए ज़मीन खाली करने के लिए जंगलों में आग लगाना या कभी कभी शिकार को पकड़ने के लिए भी आग लगायी जाती थी. लेकिन वर्ष 2020 में जिस तरह से जंगलों में आग लगी है और वर्ष 2021 में भी जंगलों में आग का प्रकोप बड़े पैमाने पर देखने को मिला है इससे ये बात साफ़ है की जंगलों में आग किसी सोची समझी साज़िश का हिस्सा है. जंगलों में आग  न केवल इकनॉमी को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि  संसाधनों को भी नष्ट कर रही है. 

 प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र, जैव विविधता और जलवायु  पर पड़ रहे प्रभाव को बचाने के लिए जंगलों की सुरक्षा और नए जंगलों का लगाया जाना बहुत आवश्यक है. लेकिन ये कार्य बड़ा है और इसे कैसे किया जाए. अगर एक आदमी एक पेड़ भी लगाए और उसकी रक्षा करे तो लाखों करोड़ों पौधों का जंगल तैयार हो सकता है. 

बीजो से जंगल लगाना और जैव विविधता बनाए रखना 

छोटे, और वार्षिक  पौधे लगाने का ये सबसे अच्छा तरीका है. सड़कों और खेतों के किनारे, खली पड़े स्थानों में देखिये आप को कैसे पौधे दिखाई देते हैं. वे पौधे जो खर पतवार के रूप में उगते हैं, उनमें मकोय के पौधे भी होंगे, चिड़चिड़ा भी होगा और मदार या आक का पौधा भी ये सभी पौधे काम के हैं और इनका जड़ी बूटी महत्त्व है. इन पौधों के बीज सीज़न पर मुफ्त में इकठ्ठा कर सकते हैं. बरसात होने से पहले सड़कों के किनारे, खली पड़े स्थानों पर, खाली ज़मीनों में इन पौधों के बीज फ़ेंक दीजिए और बरसात में नए पौधे उगते हुए देखिये. 

इसी प्रकार  बड़े वृक्षों के बीज भी लगाए जा सकते हैं. लेकिन इन बीजों को थोड़ी सी मिटटी हटाकर बोना पड़ेगा. बीज कितनी गहराई में बोया जाए इसका एक फार्मूला है. जितना बड़ा बीज हो उतनी ही उस पर मिटटी हो. जैसे इमली का बीज लगभग एक इंच आकार का होता है, इसे एक इंच की गहराई में बो दीजिए. 


इमली, अमलतास, गूलर, आम, कटहल, जामुन, लभेड़ा, बेर, बढ़ल, बेलगिरी, महुआ, करंज, सिरिस, के अलावा भी बहुत से ऐसे पौधे हैं जिनके बीज फ्री में इकट्ठा करके बरसात में बोये जा सकते हैं. इन बीजों को लगाइये और अपनी आँखों से जंगल उगता हुआ देखिये. 

जंगल लगाने के पारम्परिक  तरीके 

पारम्परिक तरीके से जंगल उगाने के लिए नरसरी से पेड़ों की पौध लेकर लगायी जाती है. इसमें किसी विशेष जाति के पौधे आम तौर से लगाते हैं. जैसे किसी स्थान पर या सड़क के किनारे इमली के पौधे, आम के पौधे, अमलतास के पौधे, गुलमोहर, सेमर, कचनार, बबूल, कैथा, आमला, जामुन, नीम, सागौन, कोरों, शीशम  आदि लगाया जाता है. ये प्रयोग सड़कों के किनारे सफल रहता है. 

खाली  स्थानों में मिक्स प्रकार के पौधों का प्रयोग सफल रहता है इससे जैव विविधता भी बनी रहती है. फलदार पौधे सरकार को राजस्व भी मुहैया कराते हैं क्योंकि फल आने पर सम्बंधित विभाग द्वारा इनको ठेके पर दिया जाता है. 

खाली स्थानों को फूलों से भरिए 

फूलों के बीज खाली स्थानों पर बोने से वह स्थान फूलों से भर जाता है. इसके लिए बाजार से सीज़नल पौधों के बीज लेकर लगाए जा सकते हैं या फिर फूलों के बीज इकट्ठा करके डाले जा सकते हैं. गुलमेंहदी, गेंदा, हॉलीहॉक, और इन जैसे बहुत से पौधे हैं जिनके बीज आसानी से मिल सकते हैं. 


ये केवल एक रूचि ही नहीं इससे बेहतर परिवेश और एक अच्छा पर्यावरण विकसित हो सकता है. 


 


बुधवार, 18 अगस्त 2021

पौधे जो जानवर नहीं खाते

बगीचा लगाने से पहले उसके किनारे बाढ़ लगाना ज़रूरी है नहीं तो जानवर पेड़ों को खा लेते हैं. ये समस्या खाली पड़ी ज़मीनो पर पौधे लगाने में आती है जहां कटीले तारों से बाढ़ लगाना मुमकिन नहीं होता. इसके अलावा ये समस्या सड़कों के किनारे लगे पेड़ों के साथ भी होती है. विशेष रूप से डिवाइडर पर लगाए गए पौधों में. उनका जानवरों से बचाना ज़रूरी होता है. 


इन स्थानों पर ऐसे पौधे लगाए जाते हैं जिन्हें जानवर न खाएं. और पौधे बचे रहें. बाढ़ लगाने  का खर्च और पौधों की देखभाल का खर्च भी बचे. इसके लिए छोटे और सुंदर पौधों में जो अधिक स्थान भी नहीं घेरते और उनमें सुंदर फूल भी आते हैं उपयोगी हैं. 

1 . कनेर 

कनेर एक ऐसा पौधा है जिसमें पीले फूल खिलते हैं. ये बहुत कॉमन है और इसे सभी जानते हैं. इसे कम पानी चाहिए होता  है और आसानी से लग जाता है. ज़हरीला होने की वजह से इसे जानवर नहीं खाते, सड़कों के किनारे और डिवाइडर पर ये पौधा लगाया जाता है. 


2. ओलिऐंडर 

इसे भी लोग कनेर कहते हैं. इसमें लाल या सफ़ेद गुच्छेदार फूल खिलते हैं. रेलवे स्टेशनों पर ये पौधा पहले बहुतायत से लगाया जाता था. ये पौधा स्कूलों, बगीचों, डिवाइडर पर लगाया जाता है. 


3. कैक्टस। 

कैक्टस की बहुत  सी किस्में  हैं. ये कांटेदार और मोटी पत्तियों वाले होते हैं. ये शुष्क स्थानों और रेगिस्तानों का पौधा है इसलिए इसे बहुत कम पानी चाहिए होता है. इसकी बाढ़ लगाने से जानवरों के प्रकोप से बचत रहती है. कुछ किस्में सड़कों के किनारे लगाने के लिए भी उपयुक्त हैं.


4. बबूल 

बबूल को ऊंट चाव  से खाता है इसके अलावा इसे जानवर नहीं खाते, इसकी बाढ़ खेतों और बागों के किनारे लगायी जाती है. इसकी फलियां और गोंद व्यापारिक महत्व की चीज़ें हैं. 


5. क्रेप जैस्मिन या चांदनी 

इस पौधे में चक्राकार सफ़ेद फूल खिलते हैं. ये पौधा कभी फूलों से खाली नहीं रहता. ये मध्यम ऊंचाई का पौधा है और आसानी से लग जाता है. स्कूलों और कालेजों में सुंदरता के लिए लगाया जाता है. इसे जानवर नहीं खाते

6. प्लूमेरिया या चम्पा 

इस पौधे के फूल भी सुंदर होते हैं और इसे भी जानवर महीन खाते, इसके फूल सफ़ेद, बीच के भाग में पीले, होते हैं इसके अलावा इस पौधे की बहुत सी किस्में हैं जिनमें लाल, पीले फूल भी आते हैं 

7. करंजवा

करंजवा या कंजा एक दवा है. ये बहुत अधिक कांटेदार पौधा है. इसके बीज दवा में काम आते हैं. इसे बागों के किनारे लगाया जाता है. इसे जानवर नहीं खाते और न इसकी बढ़ के बीच घुसने की हिम्मत करते हैं 

8. कामनी 

ये भी मध्यम ऊंचाई का सफेद खुशबूदार फूलों वाला पौधा है. इसे भी जानवर नहीं खाते, 

9. जूनिपर 

इस पौधे से भी जानवर दूर रहते हैं. ये बहुत सुंदर पौधा है और इसके लगाने से घर बहुत सुंदर लगता है. 

10. बोगेनवेलिया 

ये एक सुंदर झाड़ी है जिसे बेल के रूप में दीवारों पर चढ़ाया जाता है ये बहुत रंग के फूलों में मिलती है, लाल, सफेद, पीली, नारंजी आदि, इसके काँटों की वजह से जानवर पास नहीं आते. 



 

 

मंगलवार, 17 अगस्त 2021

शोर से सुरक्षित रहना है तो पेड़ लगाएं.

 शोर से सुरक्षित रहना है तो पेड़ लगाएं. 

पेड़ न केवल ऑक्सीजन देते हैं और हवा को साफ और सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी हैं. लेकिन इसके  आलावा भी पेड़ पौधे ही भोजन का साधन हैं. ये गर्मी और सर्दी दोनों के बीच एक रूकावट का काम करते हैं. ये प्रदूषण को घटाते हैं और बहुत से हानिकारक पदार्थ हवा और पानी से सोख लेते हैं. 

छाया के लिए बहूत पुराने ज़माने से पेड़ लगाने का चलन है. सड़को के किनारे छायादार पेड़ न केवल छाया प्रदान करते हैं बल्कि इनसे फल भी मिलते हैं, जानवरों के लिए पत्तियां, और लकड़ी भी मिलती है. ये पर्यावरण को दुरुस्त

 रखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं की पेड़ ध्वनि प्रदूषण से भी बचाते हैं और ध्वनि को सोखकर आपकी रक्षा करते हैं. 

पेड़ों के मोटे तने और खुरदुरी छाल से टकराकर ध्वनि की तरंगें परावर्तित हो जाती हैं और उनकी आवृति बदल जाती है और वे कमज़ोर पड़ जाती हैं. पेड़ों की पत्तियां ध्वनि की तरंगों को सोख लेती हैं. इस प्रकार ये ध्वनि प्रदूषण से बचाती हैं. 

ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कौन से पेड़ लगाए जाएं 

अगर आप ऐसी जगह रहते हैं  जहां सड़क से आने वाला शोर ज़्यादा है और आपके पास बड़े पेड़ लगाने के लिए जगह है तो सड़क की तरफ ऐसे  पेड़ लगाएं जिनकी पत्तियां घनी हों. देसी पेड़ों में कदम्ब, बरगद, नीम के पौधों से काम लिया जाता था. लेकिन ये वृक्ष बहुत बड़े होते हैं और इनके लगाने के लिए ज़्यादा और बड़ी जगह चाहिए. 

इस समस्या को हल करने के लिए झाड़ीदार पौधों का चयन किया जा सकता है. जैसे बोगनवेलिया जिसकी कई वैराइटी हैं और इसके फूल बहुत सुंदर लगते हैं. 


गुलाब की बेल दीवारों पर चढ़ाई जा सकती है. ये घना पौधा है और इसके फूल बहुत सुंदर लगते हैं 



देसी मेहंदी या हिना के पौधों का प्रयोग बाढ़ या हेज के रूप में क्या जा सकता है. हेज एक घनी दीवार के रूप में लगायी जाए और ये इतनी घनी हो जिसके आर पार न दिखाई दे, और इतनी ऊँची हो की इसके पार न देखा जा सके. ये हेज बहुत अच्छे ध्वनि कवच का काम करती है. 

करौंदा भी घना और खूबसूरत होता है, इसके पौधे भी अधिक ऊँचे नहीं होते लेकिन ध्वनि को सोखने में मददगार साबित हो सकते हैं. 

कामनी का पौधा भी घना होता है इसकी लम्बाई भी ज़्यादा नहीं होती और इसमें खूबदार फूल खिलते हैं. 

जुनिपर भी एक झाड़ीदार पौधा है जिसे आसानी से लगाया जा सकता है. 



कमरे में इंडोर प्लांट लगाने से न केवल ध्वनि प्रदूषण कम होता है ये पौधे हानिकारक रेडिएशन जो टीवी और अन्य गैजेट से निकलता है, को भी सोख लेते हैं. 

पेड़ों का सही इस्तेमाल ज़िंदगी को ज़्यादा  आरामदेह बना सकता है. 

मंगलवार, 8 जून 2021

कैसे दिल की सेहत को दुरुस्त रखता है अर्जुन How Arjuna Tree is beneficial for heart ?

अर्जुन एक मध्यम ऊंचाई का वृक्ष है. ये भारत में लगभग सभी जगह पाया जाता है. इसके पत्ते लम्बे आगे से गोलाई लिए अमरुद के पत्तों से मिलते जुलते होते हैं. इसमें अप्रैल, मई में लम्बे शहतूत के आकार के फूल खिलते हैं. फिर इसमें कमरक की तरह के फल लगते हैं. जो सख्त किस्म के होते हैं और इनमने पांच उभार  या पहल होते हैं. अर्जुन को साइंटिफिक भाषा में टर्मिनेलिया अर्जुना कहते हैं. 

फूलों और फलों की सहायता से अर्जुन के वृक्ष की पहचान आसानी से की जा सकती है. 


देसी दवाओं और आयुर्वेद में अर्जुन का बड़ा महत्त्व है क्योंकि ये शरीर के बहुत महत्वपूर्ण अंग दिल की दवा है. जो लोग हाय मेरा दिल से परेशान हैं उनके लिए अर्जुन एक कारगर इलाज है. 

दिल के लिए अक्सर अर्जुन की छाल का काढ़ा जिसे अर्जुन की चाय या अर्जुन टी कहते हैं प्रयोग की जाती है. 

कोरोनरी धमनी रोग या सीएडी हृदय रोग का सबसे आम प्रकार है और हृदय रोग की कारन जितनी मौतें होती हैं उनके लिए सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदार है. अर्जुन का उपयोग मुख्य रूप से आयुर्वेदिक चिकित्सा में दिल के रोगों को ठीक  करने के लिए किया जाता है.  इस पौधे के रस  में विभिन्न प्रकार के तत्व  होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं जिससे धमनियों मेंथक्का  बनता है. इसके प्रयोग से स्वस्थ लिपिड प्रोफाइल मेन्टेन रहता है. 

अर्जुन में मौजूद ओलिगोमेरिक प्रोएंथोसायनिडिन और फ्लेवोनोइड्स हृदय की प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं और शरीर के संवहनी तंत्र को मजबूत करते हैं.  यह सीएडी रोगियों में प्लेटलेट को इकठ्ठा होने से रोकता है. इसके कारण धमनियों में रक्त का प्रवाह ठीक रहता है. 

यह दिल के दर्द को रोकता है. दिल के दर्द को एनजाइना कहते हैं. दिल का दर्द ही दिल के दौरे का मुख्य कारण है. इसका झटका इतना ज़बरदस्त होता है की मरीज़ इसमें कोलैप्स कर जाता है. और जल्दी इलाज न मिले तो उसकी मौत हो सकती है. अर्जुन  रक्तचाप को कम करता है, हृदय की विफलता में कारगर है  है और लिपिड प्रोफाइल में सुधार करता है. 

अर्जुन के लगातार इस्तेमाल से ये एनजाइना की आवृत्ति और गंभीरता को कम किया जा सकता है.  हल्के एनजाइना वाले लोगों में, इस्किमिया के कारण हृदय की मांसपेशियों में जो परिवर्तन आता है अर्जुन के इस्तेमाल से वह ठीक हो सकता है. लेकिन ये सब शुरुआत में ही फायदा करता है. गंभीर दिल के रोगों में अर्जुन या अन्य देसी जड़ी बूटियों के इस्तेमाल से फायदा नहीं होता. तब डाक्टर की सलाह और इलाज ही कारगर है. 


अर्जुन की छाल के पाउडर को  मूत्रवर्धक के साथ लेने से दिल की विफलता के लक्षणों में सुधार होता है.  अर्जुन की छाल का पाउडर सिस्टोलिक रक्तचाप के स्तर को कम करके पुराने उच्च रक्तचाप के प्रतिकूल प्रभाव से हृदय की रक्षा कर सकता है। अर्जुन  हृदय की सहनशक्ति को बढ़ावा देने में मदद कर सकता  है. 

सामान्यत: चालीस वर्ष या उससे अधिक आयु वाले महिला और पुरुष यदि अर्जुन की छाल के काढ़े का प्रयोग इस प्रकार करें तो दिल की सेहत को कोई खतरा नहीं होता:

अर्जुन के पेड़ से अर्जुन की छाल खुद उतार कर छाया में सूखा लें. अब इसक छल को मोटा मोटा कूट लें और इसमें से दस ग्राम छाल एक ग्लास पानी में भिगो दें. कुछ देर भीगने के बाद इसे आग पर पकाएं की पानी आधा रह जाए. अब इस काढ़े को छान कर चाय की तरह पियें. इस काढ़े का सेवन दिन में एक बार करें और एक सप्ताह के बाद बंद करदें. एक माह में एक सप्ताह पीना काफी है. इससे  दिल की सेहत ठीक रहती है. 


रविवार, 30 मई 2021

अनार Pomegranate

अनार एक मध्यम ऊंचाई का वृक्ष है.  ये बीज और कलम दोनों से लगाया जाता है और लगाने के तीन साल में फल देने लगता है. इसमें सुंदर लाल रंग के फूल खिलते है और प्रागण के बाद इन फूलों के पिछले भाग से अनार का फल विकसित होता है. इनके फूलों का पिछला भाग पहले से ही कुछ उभरा हुआ होता है जो अनार के फल में बदल जाता है.

अनार को कैसे उगाएं How to grow Pomegranate ?

ये एक ऐसा पौधा है जो बीज से आसानी से उगाया जा सकता है. पक्के अनार की बीज एक गमले में बो दीजिये और उसे किसी छाया दर स्थान पर रखिये. गमले में हलकी नमी बनी रहे इसके लिए समय समय पर पानी का छिड़काव करते रहें. बरसात के मौसम में अनार के पौधे बहुत आसानी से उगते हैं. अगर आपके घर में ज़मीन में अनार लगाने की जगह नहीं है तो उसे गमले में भी लगाया जा सकता है. इसके लिए 14 इंच का गमला ठीक रहता है. अगर गमला न हो तो प्लास्टिक की बाल्टी का प्रयोग किया जा सकता है. अनार में गमले में भी खूब फल आते हैं. 


 अनार के फल विटामिन और आयरन का स्रोत हैं इसीलिए इसके जूस को रक्त वर्धक माना जाता है. ऐसे लोगों को जो खून की कमी का शिकार हों अनार खाने या अनार का जूस पीने की सलाह दी जाती है. अनार को बीजों समेत खाया जाता है इसमें डाइट्री फाइबर अधिक मात्रा में होता है जो आंतों से मल निकालने की शक्ति को बढ़ाता है. 

अनार दस्तों को बंद कर देता है. ऐसे लोग जो आंतों की कमज़ोरी से दस्तों से परेशान हों  उनके लिए अनार का इस्तेमाल किसी चमत्कार से कम नहीं है. अनार की छिलके में भी यही गुण हैं. 

जिन लोगों को पहले ही कब्ज़ रहता हो उनके लिए अनार का इस्तेमाल कब्ज़ को बढ़ा देता है. इसके लिए अगर अनार के जूस के साथ मौसमी का जूस मिलाकर इस्तेमाल किया जाए तो इस समस्या से छुटकारा मिल जाता है और ये दोनों जूस एक अच्छे टॉनिक का काम करते हैं. 

अनार दिल की सेहत को दुरुस्त रखता है. ये खून को पतला करता है और खून में थक्का नहीं जमने देता. अनार का नियमित इस्तेमाल सेहत को दुरुस्त रखता है.  

स्किन के लिए अनार के जूस का इस्तेमाल Use of Pomegranate juice for skin

अनार का जूस स्किन को टाइट करने के लिए फायदेमंद है. अनार का जूस निकालने के लिए पके अनार के दानों को किसी साफ कपडे में लेकर निचोड़ लें. (ध्यान रहे कि इस प्रक्रिया में कहीं भी अनार के जूस में लोहा न लगने पाये जैसे लोहे की छुरी आदि का इस्तेमाल न हो इससे अनार जूस काला पड़ जाता है और स्किन पर भी धब्बे पड़ जाते हैं.) इस जूस को सामान मात्रा में दूध की मलाई के साथ किसी कांच के बर्तन में अच्छी तरह मिक्स करलें. इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर एक घंटा छोड़ दें फिर पानी से साफ करलें. इस तरह नियमित इस्तेमाल करने से झुर्रियां मिट जाती हैं. 


रविवार, 23 मई 2021

नीम के तेल के फायदे Benefits of Neem Oil

 नीम का वृक्ष एक बहु उपयोगी वृक्ष है. इसे सब ही अच्छी तरह से जानते पहचानते हैं. इसके फल जिन्हें निमोली कहते हैं तेल का अच्छा स्रोत हैं. नीम का एक सामान्य वृक्ष साल में लगभग 30 से 50 किलो तक फल देता है. ये फल जमा कर लिए जाते हैं और फिर इनकी गुठली को गूदे और छिलके से अलग कर धोकर सुखा लिया जाता है. अब ये गुठली तेल निकालने के लिए तैयार हो जाती है. 

इन गुठलियों को मशीन के सहायता से दबाकर तेल निकाला जाता है. ये एक गाढ़ा तेल होता है जिसमें नीम के कड़वी गंध आती है और इसे आसानी से पहचाना जा सकता है. तेल निकालने के बाद जो नीम की खली बचती है वह अच्छी प्राकृतिक खाद के रूप में प्रयोग की जाती है. इसके इस्तेमाल से पौधों में कीड़ा भी नहीं लगता. 


नीम का तेल एंटीसेप्टिक है. ये जर्म्स को समाप्त करता है. फोड़े, फुंसी, घाव पर अकेला ही या फिर किसी अन्य दवा या तेल में साथ मिलकर लगाया जाता है. इसको पानी में मिलकर सर धोने से खुश्की और सर में खुजली, घाव आदि की समस्या दूर होती है. 

शैम्पू के साथ नीम के तेल का प्रयोग कैसे करें? How to use Neem Oil with Shampoo

शैम्पू के साथ नीम के तेल का प्रयोग करने के लिए जितना शैम्पू सर में लगाना हो अलग लेकर उसमें चार पांच बून्द नीम का तेल मिलकर अच्छी तरह मिक्स करलें और फिर उसे सर धोने में प्रयोग करें. इसीसे सर की खुजली, रुसी से छुटकारा मिलता है और बालों को पोषण मिलता है. 

नहाने में नीम के तेल का इस्तेमाल 

नहाने के लिए नीम के तेल का प्रयोग करने के लिए नीम के दस से पंद्रह बून्द तले को थोड़े से गर्म पानी में मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें जिसे तेल पानी में मिल जाए. अब इस पानी को नहाने के पानी में मिलादें और इस्तेमाल करें. 


सोमवार, 17 मई 2021

करंज के पेड़ को सुखचैन भी कहते हैं Karanj, Pongamia pinnata

करंज के पेड़ को सुखचैन का पेड़ भी कहते हैं.  ये एक मध्यम ऊंचाई का वृक्ष है. ये सदैव हरा भरा रहता है. इसकी छाया घनी होती है. इसकी ठंडी छाया में गर्मी से झुलसे राहगीर को जो सुख मिलता है वह अतुल्य है इसीलिए इसे सुखचैन का पेड़ कहा जाता है. 

इसका वैज्ञानिक नाम पोनगामिया पिनाटा Pongamia pinnata है. इसी को  Millettia pinnata भी कहते हैं. आम भाषा में इसे Indian Beech Tree भी कहते हैं. 

इसे बहुत आसानी से पहचाना जा सकता है. इसके पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं. इन पत्तों पर जगह जगह पर सफ़ेद या क्रीम रंग के सूखे से  निशान पड़े होते हैं. ये इस पौधे की पतियों की एक बीमारी है जो लगभग सभी पौधों पर देखने में आती है. इन धब्बों या निशानों की वजह से इस पौधे की पहचान आसानी से की जा सकती है. अप्रैल और मई माह में इसमें गुच्छों में फूल आते हैं. ये फूल नीले, बैगनी रंग के होते हैं. ये फूल इतनी अधिक मात्रा में खिलते हैं की इसके पेड़ के नीचे इन फूलों की पंखुड़ियां गिरकर एक परत बना लेती हैं. 

इस पेड़ की लकड़ी कच्ची होती है. काटने पर अंदर से पीले रंग की निकलती है. इसे इमारती लकड़ी के रूप में प्रयोग में नहीं लाया जा सकता क्योंकि सूखकर ये फट जाती है और इसमें दरारें पड़ जाती हैं. इसकी लकड़ी ईंधन के काम आती है. इसके फल जो फलियां या पॉड होते हैं छोटे आकार के होते हैं और हर फली में दो मोटे, बड़े आकार के बीज होते हैं जिनमें बहुत तेल होता है. इन बीजों को हाथ से मसलने पर ही हाथों में तेल की चिकनाहट लग जाती है. 

करंज का महत्व Importance of Pongamia Tree

इस पौधे को जानवर नहीं खाते इसलिए इसे सड़कों के किनारे और ऐसी जमीनों में जिन्हें हरा भरा बनाना हो लगाया जाता है. इसे बहुत अधिक पानी के आवश्यकता भी नहीं होती है. पौधा लगाने के एक साल तक इसकी देख भाल और पानी आदि का ध्यान रखने से ये बहुत तेज़ी से बढ़ता है. बहुत जल्दी भूमि हरी भरी हो जाती है और सड़क छायादार हो जाती है. 

इसके बीज तेल का बड़ा स्रोत हैं. बीजों का तेल करंज तेल या pongame oil कहते हैं. ये बाजार में आसानी से मिल जाता है. इसका छोटा पैक शीशी में और वयवसायक रूप में हज़ारों लीटर की मात्रा में मिल जाता है. 

करंज में एंटीसेप्टिक गुण हैं. इसका तेल साबुन बनाने में उपयोग होता है. ये नीम की तरह ही एंटीसेप्टिक है. नीम के तेल के स्थान पर करंज का तेल इस्तेमाल करने से साबुन में नीम की कड़वी गंध नहीं आती और ये साबुत बहुत अच्छा एंटीसेप्टिक और त्वचा के लिए लाभकारी होता है. करंज का तेल दाद, खाज खुजली, एक्ज़िमा, आदि पर लगाया जाता है. ये सर की रुसी और खुश्की को दूर करता है. करंज के तेल के चार पांच बूंदें किसी हेयर ऑयल में मिलाकर  सर में लगाने से सर की खुश्की दूर हो जाती है. 

करंज का तेल जोड़ों के दर्दों में भी फायदा करता है. इसकी मालिश करने से गठिया में भी लाभ हुआ है. 

पुराने ज़माने में करंज के तेल का प्रयोग रौशनी के लिए दीपक आदि जलाने में किया जाता था. चमड़ा उद्योग में चमड़े को सूखने से बचाने के लिए भी इस तेल का उपयोग करते थे. 

इसका तेल लगाने से मच्छर पास नहीं आते. 

करंज का तेल वर्तमान समय में बायो डीज़ल का एक बड़ा स्रोत है. इसे लुब्रिकेंट के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. 

करंज तेल का इस्तेमाल करते समय सावधानी रखें  की ये तेल खाने के काम में नहीं आता. इसमें ज़हरीले गुण होते हैं इसलिए इसे बच्चों के पहुंच से दूर रखें और केवल लगाने में ही प्रयोग करें. यदि इसके लगाने से त्वचा में खुजली, जलन, सूजन आदि लक्षण दिखाई दें तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद करके किसी अच्छे डाक्टर की सलाह लें. 

घर पर करंज का तेल कैसे निकालें  How to extract Karanj oil at home?

करंज के बीजों में इतना अधिक तेल होता है की इसे थोड़ी मात्रा में घर में भी निकाला जा सकता है. इसके लिए करंज के बीजों के छोटे टुकड़े कर लें और इन्हे किसी मज़बूत कपडे के थैले में भर कर किसी वज़नी चीज़ से दबाकर तेल निकाल लें. इस प्रकार थोड़ा सा तेल निकल आता है. 

Popular Posts

क्राउन आफ थॉर्न

क्राउन आफ थॉर्न या काँटों का मुकुट, यूफोर्बिएसी कुल का पौधा है. इसका तना कांटों भरा होता है. फरवरी, मार्च में इसमें गुच्छों में सुंदर फूल खि...