शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

बटरकप Buttercup, Ranunculus bulbosus

बटरकप एक सुंदर मौसमी पौधा है. इसे रैननकुलस बल्बोसस कहते हैं. इसका फूल  गुलाबी, सफेद, ऑरेन्ज, ब्लड रेड आदि रंगों का होता है. यह होम्योपैथी में एक महत्वपूर्ण दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है. 


यह पौधा घरों और बगीचों में सजावटी पौधे के रूप में लगाया जाता है. इसके फूल फरवरी, मार्च में खिलते हैं. यह पौधा ज़हरीला होता है इसलिए इसे घरों में बच्चों की पहुंच से दूर रखें। ज़हरीला होने की वजह से इसे जानवर  भी नहीं खाते। 

इसका ज़हरीला प्रभाव त्वचा में खुजली पैदा करता है. खाने से पेट में पहुंचने पर यह मैदे और आँतों की सूजन पैदा कर सकता है जिससे पेट दर्द, मिचली, उलटी की शिकायत हो सकती है. 


होम्योपैथी में यह एक दर्द निवारक दवा है. त्वचा के रोगों, गठिया, सीने में दर्द, और आँखों के रोगों में सिम्पटम के अनुसार डाक्टरों द्वारा प्रयोग की जाती है. 

आम आदमी इसे प्रयोग न करें। सजावटी पौधों को घरों में बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

सोमवार, 8 सितंबर 2025

कटेरी, Yellow fruit nightshade

 कंटकारी, बड़ी कटेरी, कटेरी, अडेरी, ममोली, छमक निमोली, एक कांटेदार पौधे के नाम हैं जिसे Solanum virginianum, Surattense nightshade, or yellow fruit nightshade  भी कहते हैं. इस पौधे के पत्ते कटे किनारों वाले लम्बे आकर के और कांटों से भरे होते हैं. 

इसमें बैगनी, नीले रंग के फूल खिलते हैं. फूल एक शाखा में दो एक दूसरे विपरीत मुख किये हुए होते हैं. फूल के बीच  में पीले रंग का जीरा होता है. इसका फूल देखने में सुंदर लगता है और बैंगन के फूल की तरह होता है. 

गांव देहात में इसके फल को दवाई के रूप में प्रयोग किया जाता है. सूखा फल पीस छानकर थोड़ी मात्रा में सूंघने से बहुत छींकें आती हैं और पुराना रुका हुआ ज़ुकाम खुल जाता है.  इसी चूर्ण को पानी में मिलाकर खुजली और दाद पर लगाने से फायदा होता है. 

यह एक अत्यंत तेज़ प्रभाव वाला पौधा है इसलिए इसका प्रयोग खाने की दवाई में कदापि न करें. ज़ुकाम और सर दर्द में सूंघने से कभी एलर्जी हो सकती है इसलिए इसका प्रयोग किसी काबिल हकीम या वैद्य की निगरानी में ही करें. 

इस बलाग में दी गयी जानकारी केवल आम समझ और जानकारी के लिए है. इनमें से किसी भी जड़ी बूटी या पौधे का बिना चिकित्सीय सलाह के इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है. 


मंगलवार, 12 अगस्त 2025

कपूर का वृक्ष Camphora officinarum

 कपूर को काफूर भी कहते हैं।  ये बाजार में सफेद टुकड़ों के रूप में मिलता है. इसकी विशेष गंध होती है जो बहुत तेज़ होती है. कमरे में अगर कपूर रखा हो तो इसकी  गंध  दूर तक फैल जाती है. यह बहुत ज्वलनशील  होता है. इसे तमाशा दिखने वाले जीभ पर जलाकर दिखते हैं. 

बाजार में मिलने वाला कपूर सिंथेटिक होता है और नकली रूप से बनाया जाता है. असली कपूर वृक्ष से प्राप्त किया जाता है जो सफेद डलियों की शक्ल में होता है. कपूर का वृक्ष बड़ा होता है और इसकी आयु भी बहुत होती है. ये चीन, जापान, ताइवान, भारत लंका आदि में पाया जाता है. इसके वृक्ष में भी कपूर की गंध आती है. इसकी लकड़ी के टुकड़ों को पानी में उबालकर इसकी भाप को ठंडा करके कपूर प्राप्त किया जाता है. 


कपूर के  वृक्ष का वैज्ञानिक नाम  Camphora officinarum  है. इसमें सफेद फूल खिलते हैं और बाद में छोटे आकर के फल लगते हैं जो काले रंग के करी पत्ते के फलों की तरह होते हैं. 

कपूर की लकड़ी में कीड़ा नहीं लगता. इसकी गंध से कीड़े, मकोड़े दूर भागते हैं. दवाओं में कपूर का प्रयोग लगाने में किया जाता है. ये फंग्सनाशक और कीटाणुनाशक है. खुजली के लिए इसे नारियल के तेल में मिलाकर लगते हैं. यह ठंडक उतपन्न करता है और खुजली को आराम देता है. नाखूनों का कला पड़ना जो अक्सर फंगस की वजह से होता है के लिए कपूर को नारियल के तेल या वैसलीन में मिलाकर लगाना लाभ करता है. 

सर के दर्द, नज़ला ज़ुकाम, दर्द निवारक बाम में कपूर भी मिला होता है. नहाने के मेडिकेटेड साबुन में भी कपूर का प्रयोग किया जाता है. 

कपूर को कभी भी खाने की दवा के रूप में प्रयोग न करें। ये बहुत हानिकारक हो सकता है. 

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