नीलोफर, कमल के पौधे की एक आम तौर से पायी जाने वाली वैराइटी है. इसे सफेद कमल, नीलोतपल, White Water Lily और Nymphaea alba भी कहते हैं.
इसके उगने का समय बरसात का मौसम है. यह कीचड़ भरे तालाबों में पैदा होता है. बरसात में जब तालाब पानी से भर जाते हैं तो इसका बीज फूटता है. इसके बीज बहुत सख्त होते हैं और एक कैप्सूल के आकार के होते हैं. इसके आलावा तालाबों में इसके जड़ें भी रह जाती हैं जिनसे यह पौधा फिर से निकलता है. तालाब इसके चौड़े पत्तों से ढक जाता है जो पानी के ऊपर तैरते रहते हैं.
इसका फूल एक लम्बी डंडी में लगता है जिससे यह पानी की सतह से ऊपर रहता है. फूल की नाल या डंडी लगभग एक से दो फुट लम्बी होती है. इसके सफेद फूल के बीच पीले रंग का जीरा या पराग होता है. इसके फूल में कुछ नीली सी आभा होती है इसी लिए इसे नील कमल और नीलोफर कहते हैं. अंग्रेजी में इसका नाम Nymphaea alba यानि सफेद जलपरी है.
जैसे इसका नाम सुंदर है ऐसे ही इसका काम भी सुंदर है. गर्मी और बरसात के मौसम में पैदा होने के कारण यह ठंडे और तर स्वभाव वाला है. इसका प्रयोग गर्मी की बीमारियो में और दिमाग को शांत करने और दिल को शक्ति देने के लिए हकीम करते हैं. ठंडे पेय पदार्थों या शर्बत में हकीम इसका प्रयोग वर्षों से कर रहे हैं. इसके बीज की गिरी बलवर्धक है और पेशाब खुलकर लाती है.
इसकी जड़ों या कमल नाल की सब्ज़ी भी बनाकर खायी जाती है. इसके फल को कमल गट्टा कहते हैं. इसमें कैप्सूल के आकार के बीज भरे होते हैं जिन्हे कच्चा भी खाया जाता है और सूख जाने पर इसकी गिरी को दवाओं में प्रयोग करते हैं.


