रविवार, 17 मई 2026

कपिकच्छु, केवांच, कौंच Mucona pruriens

कपिकच्छु एक बेल है जो झाड़ियों और पेड़ों पर लिपटती है. इसे केवांच, कौंच, आदि भी कहते हैं. इसमें सेम की तरह फलियां लगती हैं लेकिन वह सेम की फलियों से ज़्यादा मोटी और गोलाई लिए होती हैं और इन पर रोआं होता है. इस रोएं के कारण ही इसे अंग्रेजी में velvet bean या मखमली फली कहते हैं. 

इसका नाम कपिकच्छु इसलिए पड़ा है कि बंदर जब इसे छूने या इसके पास जाने की कोशिश करता है तो इसका रोआं लग जाने से बहुत खुजली होती है. तभी इसे बंदर की खुजली या कपिकच्छु नाम दिया गया. 

अंग्रेज़ों ने देखा कि इसकी खुजली गायों के लग जाती है तो उन्होंने इसका नाम cowitch गाय की खुजली या cowhage रखा. 

इसकी फलियों पर बारीक़ रेशे या रोआं होने के कारण ही इसे कवच शब्द से पहचान मिली। यानि यह फली ऐसी है जिसने अपनी रक्षा के लिए कवच बना रखा है. इसकी फलियां सूखने पर इसका रोआं हवा से उड़ने लगता है और उधर से निकलने वालों के शरीर में खुजली पैदा करता है. 


यह दो प्रकार का होता है. एक के बीज सफेद रंग के दूसरे के बीज काले होते हैं. इसके बेज मोटे सेम के बीजों के आकर के लेकिन बड़े होते हैं. बरसात में इसकी बेलें खूब बढ़ती हैं और जाड़ों में इसमें फूल आते हैं. इसकी फलियों की सब्ज़ी भी बनाकर खाई जाती है. इसके छिलके का ऊपर का भाग छीलकर निकाल देते हैं. या फिर केवल बीजों की ही सब्ज़ी बनाते हैं. 

सफेद कौंच की फलियां कच्ची हालत में साफ़ हरी दिखाई देती हैं. जबकि  काले कौंच की फलियां कच्ची हालत में कुछ कालापन लिए होती हैं. 

पहले ज़माने में इसके रुएँ को पेट के कीड़े मारने के लिए गुड़ के अंदर रख कर खिलाते थे जिससे यह पेट में जाकर कीड़ों को नष्ट करे. लेकिन यह एक खतरनाक दवा है और इसका प्रयोग खतरे से खाली नहीं। 

कौंच के बीजों का प्रयोग बलवर्धक और पुरुष यौन विकारों के इलाज में  किया जाता है.  कौंचपाक  एक आयुर्वेदिक दवा है जिसका मुख्य अवयव कौंच है. 

कौंच मूड को अच्छा बनाने, डिप्रेशन दूर करने और एक जनरल टॉनिक के रूप में अच्छी वनस्पति है.  इसके बीजों का प्रयोग शुद्ध करके ही किया जाता है. इन बीजों को पानी या दूध में भिगोकर उबाल लिया जाता है और उनका छिलका उतरकर सुखाकर कूटकर दवा में प्रयोग किया जाता है. बिना शुद्ध किए प्रयोग करने से यह नुक्सान करता है और गंभीर समस्याएं उतपन्न होती हैं. 

इस वनस्पति में रक्तरोधक गुण भी हैं. विशेष तौर से बवासीर के खून को बंद करने में सहायक है यदि इसका विधिवत प्रयोग किया जाए. 


गुरुवार, 14 मई 2026

खेजड़ी, जंड, शमी Prosopis cineraria

खेजड़ी, खेजड़ा, जंड एक रेगिस्तानी वृक्ष है. इसे शमी भी कहा जाता है. पंजाब में इसे जंड कहते हैं और इसकी फलियों को सांगर या सांगरी। इन फलियों की सब्ज़ी बनाकर खाई जाती है. अरबी फ़ारसी में इसे गाफ कहा जाता है. इसका वानस्पतिक नाम Prosopis cineraria है. 

 

इस पेड़ में जनवरी में फूल खिलने लगते हैं. फूल हल्के पीले रंग के एक लम्बी शाखा में लगते हैं और  उनका आकार बोतल साफ़ करने वाले ब्रश की तरह लगता है. फूलों के बाद इसमें लम्बी फलियां लगती हैं. इन फलियों को सांगर या सांगरी कहते हैं. 

रेगिस्तानी इलाकों में, विशेषकर राजस्थान में, सऊदी अरब और अरब के अन्य देशों में इसका बड़ा महत्व है. यह पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है. दूर से देखने पर इसके वृक्ष बबूल की तरह ही लगते हैं. इसकी पत्तियां भी बबूल से मिलती जुलती होती हैं. इसमें कांटे भी होते हैं. लेकिन यह कांटे छोटे होते हैं और बबूल की तरह लम्बे नहीं होते। 

मुंह के छालों के लिए इसकी पत्तियां चबाई जाती हैं जिससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं. 

बुधवार, 13 मई 2026

पुत्रजीवक, जियापोता, Putranjiva roxburghii

जियापोता एक माध्यम आकार का वृक्ष है. इसे पुत्रजीवक भी कहते हैं और आयुर्वेद में इस पौधे के बीजों का बड़ा महत्व है. इसका वानस्पतिक नाम Putranjiva roxburghii है. जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है इसका प्रयोग बांझपन दूर करने और संतान उत्पत्ति के लिए किया जाता है. पुत्र से मतलब संतान से है ऐसा नहीं है कि पुत्रजीवक के इस्तेमाल से केवल पुत्र ही प्राप्त होता है. 


यह पौधा बांझपन दूर करने के स्वभाव के कारण पुत्रजीवक के नाम से प्रसिद्ध है. संतान उत्पत्ति के मामले में  एक अन्य जड़ी बूटी जो आयुर्वेद में प्रयोग की जाती है वह शिवलिंगी है. शिवलिंगी के बीज और जियापोता के बीज दोनों समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण के रूप में गाय के दूध के साथ आधे से एक छोटा चमच दिन में दो या तीन बार प्रयोग किये जाते हैं. इसका प्रयोग रजोपरांत किया जाता है. कहा जाता है कि लगातार तीन माह तक इसके प्रयोग से निःसंतान स्त्रियों को भी संतान प्राप्त होती है. 

यह केवल स्त्रियों की दवा नहीं है. इसका प्रयोग पुरुषों द्वारा भी किया जाता है. यह स्पर्म की गुणवत्ता को बढ़ाता है और आम स्वास्थ्य में सुधार लाता है. 

यह बहुत कमाल की दवा है. शिवलिंगी के साथ प्रयोग करने से इसके गुण जाग्रत हो जाते हैं.लेकिन इसका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की निगरानी और उसकी सलाह से ही करें। 

  

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