शनिवार, 11 जुलाई 2026

गुलमोहर Delonix regia, Royal Poinciana

 गुलमोहर एक माध्यम ऊंचाई का सुंदर वृक्ष है. इसकी लकड़ी कमज़ोर होती है. इसके पत्ते इमली की पत्तियों की तरह छोटे पत्तों से बने होते हैं. इसमें लाल रंग के फूल खिलते हैं. यह जब खिलता है तो बहुत सुंदर लगता है. इसीलिए इसे गुलमोहर यानि गोल्ड मोहर, सोने की अशर्फी, या गले अशर्फी भी कहते हैं. 


इसका वैज्ञानिक नाम Delonix regia है. इसकी फूल की एक पत्ती में क्राउन बना होता है इसी लिए इसे शाही फूल कहते हैं. ऐसा ही क्राउन जलसुम्भी के फूल की एक पंखुड़ी में भी होता है. यानी फूल की एक पंखुड़ी जो सबसे ऊपर होती है क्राउन वाली होती है. 

इसमें चौड़ी बड़ी फलियां लगती हैं जिनमें बीज होते हैं. इसकी फली काफी मज़बूत होती है. इसे किसान जलाने के काम में लाते हैं इसके बीजों में तेल होता है जिसकी वजह से आग खूब जलती है. 

आम तौर से मवेशी इसके पत्ते नहीं खाते। लेकिन कभी इसे चारे के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. 


यह वृक्ष आम तौर से सुंदरता के लिए बंगलों और पार्को में लगाया जाता है. सड़कों के किनारे भी लगाया जाता है. लकड़ी कमज़ोर होने के कारण आंधी बारिश में इसके डालें फट जाती हैं. इसलिए आंधी में इसके पेड़ों से दूर रहें। 

बुधवार, 1 जुलाई 2026

सुखदर्शन White Spider Lily

सुदर्शन, या सुखदर्शन, एक सजावटी पौधा है. ये पौधा बल्ब से उगाया जाता है. यह लिली किस्म का पौधा है. इसकी पत्तियां लम्बी, चिकनी हरी होती हैं. इनकी लम्बाई लगभग दो फिट तधा चौड़ाई दो से तीन इंच तक होती है. इस पौधे में साल में एक बार फूल खिलते हैं. इसकी जड़ से एक लम्बी शाखा निकलती है जिसमें दस बारह कलियां निकलती हैं और उनसे फूल खिलते हैं. 

अंग्रेजी में इसे White Spider Lily कहते हैं. इसका यह नाम इसलिए पड़ा है कि इसके फूल से छ लम्बी पंखुड़ियां निकलती हैं जैसे मकड़ी की टाँगें होती हैं. इसके फूल से जो तंतु निकलते हैं उनपर छ केसर के आकर के लम्बे तंतु लगे रहते हैं जो इसके फूल को बहुत खूबसूरत बनाते हैं. 


इसमें हल्की खुशबु भी होती है. इसके खिलने का समय बरसात का है. फूल शाम को चार बजे के आस पास खिलता है और रात भर अपनी सुंदरता बिखेरता है. 

इसके पत्तों को गर्म करके निचोड़ने से चिपचिपा गाढ़ा रस  निकलता है. इसे लोग कान में दर्द होने पर कान में डालते हैं. इसका प्रभाव सूजन घटाने वाला और दर्द में सुकून  देने वाला  है.इससे कान के दर्द में राहत मिलती है. 

इसमें कैंसर रोधी गुण भी  हैं. लेकिन इसका प्रभाव ज़हरीला है और खाने की दवा में प्रयोग नहीं किया जा  सकता. इसके गलत प्रयोग से उलटी, दस्त, मतली, आँतों में सूजन हो जाती है. इसे बच्चो की पहुंच से दूर रखें। 

 

शुक्रवार, 26 जून 2026

शरपुंखा, सरफोका Tephrosia purpurea

शरपुंखा एक छोटा झाड़ीदार पौधा है. इसे हकीम सरफोका कहते हैं. यह खाली पड़े स्थानों पर अपने आप उगने वाली जड़ी बूटी  है. इसकी पत्तियां इमली की पत्तियों की तरह होती हैं. इसमें गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं और फूल गिरने के बाद इसमें छोटी  फलियां लगती हैं जो गुच्छों में होती हैं और इनमें इसके बीज होते हैं.  इसकी एक किस्म ऐसी भी है जिसमें सफेद फूल खिलते हैं. 

इसका वानस्पतिक नाम Tephrosia purpurea है.  यह आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्यति की बड़ी दवा है जिसका प्रयोग बहुत से रोगों में किया जाता है  इसका पूरा पौधा दवा में प्रयोग किया जाता है. कभी इसकी पत्तियां ही प्रयोग की जाती हैं. इसे खून साफ़ करने, यानि रक्त शोधक के रूप में, बढ़ी हुई तिल्ली को घटाने, बढे हुए लिवर को कम करने, फैटी लिवर के रोग में, तधा लिवर और रक्त को डि- टॉक्स  करने यानि उससे ज़हरीले माद्दे निकालने और गुर्दो के रोग में पेशाब लाने के लिए किया जाता है. 

सरफोका, पेशाब लाने वाला, सूजन घटाने वाला और रक्त शोधक है. इसलिए इसे हकीम बहुत से रोगों में प्रयोग करते हैं. यह आसानी से मिलने वाली जड़ी बूटी है और इसका प्रभाव अमृत के समान है. 

लेकिन फिर भी इसके प्रयोग से पहले किसी काबिल वैद्य या हकीम की सलाह ज़रूरी है. स्वयं प्रयोग घातक हो सकता है. यह लेख केवल पेड़ पौधों से आम जानकारी हासिल करने के लिए है और किसी भी रोग या रोगों की चिकित्सा में इस जानकारी का प्रयोग इसका ध्येय नहीं है. 

 

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