बुधवार, 13 मई 2026

पुत्रजीवक, जियापोता, Putranjiva roxburghii

जियापोता एक माध्यम आकार का वृक्ष है. इसे पुत्रजीवक भी कहते हैं और आयुर्वेद में इस पौधे के बीजों का बड़ा महत्व है. इसका वानस्पतिक नाम Putranjiva roxburghii है. जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है इसका प्रयोग बांझपन दूर करने और संतान उत्पत्ति के लिए किया जाता है. पुत्र से मतलब संतान से है ऐसा नहीं है कि पुत्रजीवक के इस्तेमाल से केवल पुत्र ही प्राप्त होता है. 


यह पौधा बांझपन दूर करने के स्वभाव के कारण पुत्रजीवक के नाम से प्रसिद्ध है. संतान उत्पत्ति के मामले में  एक अन्य जड़ी बूटी जो आयुर्वेद में प्रयोग की जाती है वह शिवलिंगी है. शिवलिंगी के बीज और जियापोता के बीज दोनों समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण के रूप में गाय के दूध के साथ आधे से एक छोटा चमच दिन में दो या तीन बार प्रयोग किये जाते हैं. इसका प्रयोग रजोपरांत किया जाता है. कहा जाता है कि लगातार तीन माह तक इसके प्रयोग से निःसंतान स्त्रियों को भी संतान प्राप्त होती है. 

यह केवल स्त्रियों की दवा नहीं है. इसका प्रयोग पुरुषों द्वारा भी किया जाता है. यह स्पर्म की गुणवत्ता को बढ़ाता है और आम स्वास्थ्य में सुधार लाता है. 

यह बहुत कमाल की दवा है. शिवलिंगी के साथ प्रयोग करने से इसके गुण जाग्रत हो जाते हैं.लेकिन इसका प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक की निगरानी और उसकी सलाह से ही करें। 

  

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