गुरुवार, 14 मई 2026

खेजड़ी, जंड, शमी Prosopis cineraria

खेजड़ी, खेजड़ा, जंड एक रेगिस्तानी वृक्ष है. इसे शमी भी कहा जाता है. पंजाब में इसे जंड कहते हैं और इसकी फलियों को सांगर या सांगरी। इन फलियों की सब्ज़ी बनाकर खाई जाती है. अरबी फ़ारसी में इसे गाफ कहा जाता है. इसका वानस्पतिक नाम Prosopis cineraria है. 

 

इस पेड़ में जनवरी में फूल खिलने लगते हैं. फूल हल्के पीले रंग के एक लम्बी शाखा में लगते हैं और  उनका आकार बोतल साफ़ करने वाले ब्रश की तरह लगता है. फूलों के बाद इसमें लम्बी फलियां लगती हैं. इन फलियों को सांगर या सांगरी कहते हैं. 

रेगिस्तानी इलाकों में, विशेषकर राजस्थान में, सऊदी अरब और अरब के अन्य देशों में इसका बड़ा महत्व है. यह पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है. दूर से देखने पर इसके वृक्ष बबूल की तरह ही लगते हैं. इसकी पत्तियां भी बबूल से मिलती जुलती होती हैं. इसमें कांटे भी होते हैं. लेकिन यह कांटे छोटे होते हैं और बबूल की तरह लम्बे नहीं होते। 

मुंह के छालों के लिए इसकी पत्तियां चबाई जाती हैं जिससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं. 

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