मंगलवार, 12 मई 2026

मरोड़ फली Helicteres isora, (Indian Screw plant)

मरोड़ फली एक बेलनुमा झाड़ीदार पौधा है. यह मध्यम ऊंचाई का होता है.  इस पौधे की बनावट में ऐंठन होती है. इसकी फलियां ऐसी लगती हैं जैसे किसी ने रस्सी की तरह बल देकर ऐंठ दिया हो. 

नेचर जो पेड़, पौधे  पैदा करती है उसके गुणों का अंदाज़ा बाहरी आकर, बनावट, गंध से भी हो जाता है. मानो नेचर ने मनुष्य को इशारा किया हो कि यह पौधा किस उपयोग में लाया जा सकता है. जैसे मरोड़ फली का ऐंठा होना इस बात का सूचक है कि यह ऐसे रोगों में जहां ऐंठन, मरोड़ का प्रभाव हो कारगर सिद्ध हो सकती है. 


हकीमों ने इसे पेट की ऐंठन, मरोड़ के लिए इस्तेमाल किया और वे इसके गुणों को देखकर चकित रह गये. पेट की ऐंठन ज़्यादातर पेचिश, खुनी पेचिश आदि में होती है जब आंतों के तंतु सुकड़कर ऐंठने लगते हैं ऐसे में मरोड़ फली बहुत काम की दवा है. यह न केवल ऐंठन को दूर करती है इसका एन्टिसेपटिक स्वभाव कीटाणुओं को  भी नष्ट करता है और दर्द से राहत दिलाता है. 

इसका प्रयोग पेट के रोगों में जैसे दस्त, पेचिश, मरोड़, तधा आँतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में किया जाता है. यह आंतो की सूजन घटाती है, आँतों की खराश को दूर करती है और पाचन को बेहतर बनाती हैं. मरोड़ फली रक्त शोधक भी है. हकीम और वैद्य इसका इस्तेमाल ज़रूरत के अनुसार करते हैं. इसे अन्य दवाओं  के साथ काढ़े के रूप में या पाउडर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले काबिल हकीम या वैद्य की सलाह ज़रूरी है. यही बात मरोड़ फली के इस्तेमाल में भी ध्यान रखें। 


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