मंगलवार, 3 मार्च 2020

जो रस से भरी है वही रसभरी है

 रसभरी एक पीले रंग का कवर के अंदर बंद फल है. ये फल बाजार में सर्दी का मौसम जाते समय फरवरी, मार्च के महीनों में मिल जाता है. मुख्यतः ये अफ्रीका का पौधा है. इसे अंग्रेजी में केप गूज़बरी और गोल्डनबरी भी कहते हैं. इसका पौधा बीज या फिर कटिंग से उगाया जाता है. बरसात के मौसम में इसके पौधे खूब बढ़ते हैं और जाड़ों में इसमें फल आते हैं. जो जाड़ा बीतते बीतते पककर पीले गोल्डन हो जाते हैं और इनके ऊपर का छिलका या कवर सूख जाता है. ये फल खाने में खट्टे-मीठे होते हैं.
रसभरी लीवर के लिए फायदेमंद हैं. इसमें सूजन घटाने के गुण हैं और ये लीवर के फंक्शन को तेज़ करती है. ये कोलेस्ट्रॉल के लेवल को ठीक रखती है और इस लिए ख़राब कोलेस्ट्रॉल के कारण बनने वाली पित्ते के पथरियों पर भी असर डालती है. इसके इस्तेमाल से पित्त गाढ़ा नहीं होने पाता और पित्ते में पथरी नहीं. बनती. यही काम इमली भी करती है. इमली का इस्तेमाल करने वालों के पित्ते में पथरी नहीं होती.
रसभरी न केवल इम्युनिटी यानि रोगों से लड़ने की क्षमता को बढाती है बल्कि हड्डियों को भी मज़बूती देती है. आंखों के लिए ये बहुत लाभकारी है. इसके इस्तेमाल से आंखों में मोतियाबिंद नहीं होता और आंखों के मांस पेशियां मज़बूत रहती हैं जिससे आंखों की रौशनी बनी रहती है.
रसभरी का बहुत बड़ा फ़ायदा कैंसर से बचाने में है. इसमें ऐसे तत्व हैं जो कैंसर को न केवल होने नहीं देते बल्कि ट्यूमर को नष्ट करने के क्षमता रखते हैं. ये ब्लड कैंसर के लिए भी लाभकारी है.
अजीब बात है कि पक्की पीली रसभरी के इतने फायदे हैं लेकिन कच्ची रसभरी ज़हरीली होती है.  इसके फूल, पत्ते और पौधा सभी ज़हरीले हैं. इसके इस्तेमाल से जी मिचलाना, उल्टी आना, पेट में दर्द और घबराहट होती है. ऐसे में तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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