शुक्रवार, 26 जून 2026

शरपुंखा, सरफोका Tephrosia purpurea

शरपुंखा एक छोटा झाड़ीदार पौधा है. इसे हकीम सरफोका कहते हैं. यह खाली पड़े स्थानों पर अपने आप उगने वाली जड़ी बूटी  है. इसकी पत्तियां इमली की पत्तियों की तरह होती हैं. इसमें गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं और फूल गिरने के बाद इसमें छोटी  फलियां लगती हैं जो गुच्छों में होती हैं और इनमें इसके बीज होते हैं.  इसकी एक किस्म ऐसी भी है जिसमें सफेद फूल खिलते हैं. 

इसका वानस्पतिक नाम Tephrosia purpurea है.  यह आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्यति की बड़ी दवा है जिसका प्रयोग बहुत से रोगों में किया जाता है  इसका पूरा पौधा दवा में प्रयोग किया जाता है. कभी इसकी पत्तियां ही प्रयोग की जाती हैं. इसे खून साफ़ करने, यानि रक्त शोधक के रूप में, बढ़ी हुई तिल्ली को घटाने, बढे हुए लिवर को कम करने, फैटी लिवर के रोग में, तधा लिवर और रक्त को डि- टॉक्स  करने यानि उससे ज़हरीले माद्दे निकालने और गुर्दो के रोग में पेशाब लाने के लिए किया जाता है. 

सरफोका, पेशाब लाने वाला, सूजन घटाने वाला और रक्त शोधक है. इसलिए इसे हकीम बहुत से रोगों में प्रयोग करते हैं. यह आसानी से मिलने वाली जड़ी बूटी है और इसका प्रभाव अमृत के समान है. 

लेकिन फिर भी इसके प्रयोग से पहले किसी काबिल वैद्य या हकीम की सलाह ज़रूरी है. स्वयं प्रयोग घातक हो सकता है. यह लेख केवल पेड़ पौधों से आम जानकारी हासिल करने के लिए है और किसी भी रोग या रोगों की चिकित्सा में इस जानकारी का प्रयोग इसका ध्येय नहीं है. 

 

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