गुरुवार, 8 मार्च 2018

गुलखैरा

तुख्मे-खत्मी एक मौसमी पौधे के बीज हैं जो हकीमी दवाओं में इस्तेमाल किये जाते हैं.  इस पौधे को बगीचों में सुंदरता के लिए लगाया जाता है. इसे हॉलीहॉक के नाम से आम तौर से लोग जानते हैं. गुलखैरा के नाम से भी प्रसिद्ध है. यह मैलो परिवार का पौधा है. हकीम इसकी एक वैराइटी को खत्मी कहते हैं और इसके बीज तुख्मे-खत्मी और जड़ को रेशा-ए -खत्मी के नाम से इस्तेमाल करते हैं.

इसके फूल कई रंग के होते हैं. अजीब बात ये है कि इस पौधे में आम तौर से कोई शाखा नहीं निकलती और सारे फूल इसके तने में लगते हैं. कुछ पौधों में शाखाएं भी निकलती हैं लेकिन ऐसा कम होता है.  पौधा सीधा बढ़ता जाता है और तने में कलियां आती रहती हैं जो बारी  बारी खिलती रहती हैं.
तुख्मे-खत्मी नज़ला, ज़ुकाम और खांसी में कारगर है. बरसों से हकीम इसके बीजों को अन्य दवाओं के साथ जोशांदे में इस्तेमाल कर रहे हैं. तुख्मे-खत्मी नज़ला और खांसी में आराम देता हैं. इसका जोशांदा जिसे तुख्मे-खत्मी की चाय या काढ़ा भी कहते हैं खांसी से राहत दिलाता है.

ये गले की खराश में भी फायदा करता है. इसके बीजों और जड़ में म्यूसिलेज या चिपचिपा पदार्थ होता है. ये म्यूसिलेज आंतों में फिसलन पैदा करता है जिससे डिसेन्ट्री के जर्म्स उसमें लिपट कर निकल जाते हैं. इसकी जड़ को पेचिश के इलाज में प्रयोग किया जाता है.
हॉलीहॉक एक सजावटी पौधा ही नहीं एक बड़ी और कारगर दवा है.
कहा जाता है की मेडिकल आइकन के तौर पर जिस निशान का प्रयोग किया जाता है जिसमें एक छड़ी पर एक सांप लिपटा होता है वह गुलखैरे की लकड़ी है.
दवाई गुण के कारण ही गुलखैरे को इतनी अहमियत दी गई है. 

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