सतावर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सतावर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

शतावरी

शतावरी, सतावर, एक कांटेदार बेल है. इसके पत्ते बारीक़ नुकीले होते हैं. बारीक़ पत्तियों के गुच्छों के कारन ये बेल बहुत सुन्दर लगती है. इसे सजावट के लिए घरों और बगीचों में लगाया जाता है. घनी पत्तियों और कांटेदार होने के वजह से इसको दीवारों और बगीचों की बाढ़ पर सुरक्षा के लिए भी लगाया जाता है.

दवा के रूप में इसकी जड़ या कंद प्रयोग की जाती है. इसकी जड़े गुच्छेदार, बीच से मोटी और किनारों पर पतली होती हैं. इन्हे सूखा लिया जाता है. बाजार में देसी दवाओं और जड़ी बूटियों की दुकानों पर सतावर या शतावरी के नाम से इसकी सुखी हुई जड़े मिलती हैं. सूखने पर इन जड़ो पर लम्बाई में झुर्रियां और सिलवटे पद जाती है. सतावर का स्वाद खाने में कुछ मीठा और बाद में हल्का कड़वापन लिए होता है.
सतावर एक पौष्टिक दवा है. पुष्टकारक दवाओं में इसका प्रयोग किया जाता है. ये शरीर को बलशाली बनती है. दुबले लोग इसके नियमित प्रयोग से मोटे  हो जाते हैं.
सतावर दूध पिलाने वाली माओं के लिए एक टानिक का काम करती है. ये दूध की मात्रा बढाती है. श्वेत प्रदर को जड़ से नष्ट कर देती है.
जो लोग यूरिक एसिड की समस्या से ग्रस्त हैं. जिनकी शुगर बढ़ी हुई है उन्हें सतावर के प्रयोग से बचना चाहिए.
सतावर की पत्तियां स्वाभाव से ठंडी होती  हैं. इनको शाक के रूप में काम मात्रा में इस्तेमाल करने से नकसीर का खून बहना बंद हो जाता है.

Popular Posts

गुलमोहर Delonix regia, Royal Poinciana

 गुलमोहर एक माध्यम ऊंचाई का सुंदर वृक्ष है. इसकी लकड़ी कमज़ोर होती है. इसके पत्ते इमली की पत्तियों की तरह छोटे पत्तों से बने होते हैं. इसमें ल...