बुधवार, 24 जनवरी 2018

मकोय

मकोय घास फूस के साथ उगती है. इसको मकोह, मकोई, मकुइया और काचमाच या काचूमाचू भी कहते  हैं.  इसके उगने का मौसम बरसात और रबी के फसल के दौरान है. जाड़ों के दिनों में मकोय में सफ़ेद फूल आते हैं और इसमें लाल या काले रंग के फल लगते हैं. ये फल छोटे छोटे लाल या काले रंग के होते हैं. फलों के रंग के कारण मकोय दो प्रकार की होती है. लाल मकोय और काली मकोय.
मकोय के फलों का स्वाद खट्टा -मीठा होता है. इन फलों में बारीक बीज भरे होते हैं. मकोय लिवर की बीमारियों के लिए बहुत उपयोगी है. लिवर की बीमारी के कारण हाथ पैर में सूजन आ जाती है, मकोय इस सूजन को समाप्त कर देती है. लिवर की सूजन में चेहरे, पेट और पैरों पर भी सूजन का प्रभाव पड़ता है. ऐसे रोगियों को मकोय की सब्ज़ी बनाकर खिलने से या मकोय के पत्तों को पीसकर उसका रस पिलाने से लाभ होता है.

स्त्रियों के रोगों में भी जब शरीर आन्तरिक भाग में शोथ हो मकोय बहुत लाभकारी दवा है.
मकोय लिवर के कैंसर से भी बचती है. लिवर के विकारों में मकोय, कसौंदी और कासनी के पत्तों का बराबर मात्रा में सब्ज़ी की तरह प्रयोग करने से आशातीत लाभ होता है.
पके हुए मकोय के फलों  के बीजों से मकोय को आसानी से बगीचे या गमले में उगाया जा सकता है. ये आसानी से उगने और बढ़ने वाला पौधा है. लेकिन बहुत उपयोगी है. मकोय के पत्तों की सब्ज़ी बनाकर कभी कभार खाने से शरीर में जमा पॉइज़न निकल जाते हैं. मकोय डायूरेटिक यानि पेशाबआवार जड़ी बूटी है. अपने इसी गुण के कारण  ये जलंधर रोग यानि ड्रॉप्सी में बहुत लाभ करती है.
दवा के रूप में लाल मकोय का प्रयोग किया जाता है. काली मकोय के गुण -धर्म लाल मकोय से अधिक शक्तिशाली है. लेकिन काली मकोय के इस्तेमाल से बहुत से लोगों का जी मिचलाने लगता है और दस्त आने लगते हैं.
दवा के रूप में प्रयोग करना हो तो मकोय को हमेशा पकाकर प्रयोग करना चाहिए कच्ची मकोय का प्रयोग हितकर नहीं रहता है. ये रोग को बढ़ा सकती है.   

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